ग्रह दोष समाधान वैदिक पूजा

ग्रह दोष समाधान वैदिक पूजा व्यक्ति की जन्म कुंडली में उपस्थित ग्रहों के अशुभ प्रभाव को शांत करने के लिए की जाती है। जब कुंडली में किसी ग्रह की स्थिति प्रतिकूल होती है, तो जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे कार्यों में रुकावट, आर्थिक कठिनाइयाँ, मानसिक तनाव, विवाह में विलंब, स्वास्थ्य संबंधी परेशानियाँ एवं पारिवारिक अशांति। ऐसे समय में वैदिक शास्त्रों में ग्रह दोष निवारण हेतु विशेष पूजाओं का विधान बताया गया है।

इस पूजा में अनुभवी आचार्य द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण, नवग्रह पूजन, हवन, शांति पाठ एवं संकल्प के साथ अनुष्ठान संपन्न कराया जाता है। कुंडली के अनुसार ग्रहों के मंत्रों का चयन कर पूजा की जाती है, जिससे ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और शुभ फल की प्राप्ति होती है।

ग्रह दोष समाधान वैदिक पूजा के अंतर्गत निम्न प्रमुख पूजाएँ सम्मिलित हैं—

  • शनि शांति पूजा – शनि ग्रह के अशुभ प्रभाव, साढ़ेसाती, ढैय्या एवं शनि दोष की शांति के लिए।

  • राहु-केतु शांति पूजा – राहु एवं केतु ग्रह से उत्पन्न बाधाओं, भ्रम, भय और अचानक होने वाली समस्याओं के निवारण हेतु।

  • मंगल दोष पूजा – विवाह में विलंब, वैवाहिक कलह एवं मांगलिक दोष के समाधान के लिए।

  • पितृ शांति पूजा – पितृ दोष की शांति, पूर्वजों की कृपा एवं पारिवारिक सुख-शांति के लिए।

  • नवग्रह शांति पूजा – सभी नौ ग्रहों के संतुलन एवं समग्र ग्रह शांति के लिए।

  • अन्य ग्रह शांति एवं विशेष वैदिक पूजाएँ – कुंडली के अनुसार आवश्यक अनुष्ठान।

मान्यता है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई ग्रह दोष समाधान वैदिक पूजा से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं, बाधाएँ दूर होती हैं और सुख, शांति, समृद्धि एवं सफलता की प्राप्ति होती है।